Nitish Archive

जब नीतीश कुमार को पता चला था कि उनके पिता ने उनकी होने वाली पत्नी रेणु के पिता से दहेज के एवज़ में २२ हज़ार रुपए ले रहे हैं, तो नीतीश आग बबूला हो गए।

स्वाभिमान की एक आधी रात

नीतीश पटना में थे, शाम हो चुकी थी और बख़्तियारपुर के लिए आख़िरी ट्रेन जा चुकी थी। नीतीश जी ने अपने दोस्त नरेंद्र सिंह को एक ऑटो का इंतज़ाम करने को बोला। पर पैसे न तो नीतीश जी के पास थे और न ही नरेंद्र जी के पास। फक्कड़ छात्र आंदोलन वाले छात्रों के पास इतना पैसा कहाँ से होगा?

बिना पैसे, दोनों ने तीन सौ रुपए में एक ऑटो किया और बख़्तियारपुर पहुँच गए। वहाँ पहुँचकर पिता से पैसे लेकर ऑटो वाले को दिया।

पिता से वैचारिक मतभेद

नीतीश जी अपने पिता से सामने-सामने बात नहीं करते थे। घर के पहले मंज़िल पर दोनों मित्र पहुँचे और मित्र नरेंद्र जी के मार्फ़त से निचले मंज़िल पर सोने की तैयारी कर रहे वैद्य जी (पिता) को यह संदेश भेजा गया कि:

“नीतीश जी शादी नहीं करेंगे अगर एक भी रुपया दहेज लिया गया।”

उसके बाद जब नीतीश जी को पता चला कि दहेज तो लिया जा चुका है, तब तो नीतीश जी और अधिक ग़ुस्से में आ गए और पिता के साथ-साथ अपने होने वाले ससुर तक पर भड़क गए।

सामाजिक हलचल और साहस

अब लिया हुआ पैसा वापस करना था। यह वो दौर नहीं था जब दहेज होटल के बंद कमरे में लिया जाता हो या बैंक ट्रांसफर होता हो। यह वो दौर था जब दहेज देते समय गाँव के सभी प्रतिष्ठित लोग उपस्थित होते थे।

जब खबर फैली कि अब पैसा वापस करना पड़ेगा, तो यह खबर:

न एक या दो परिवार तक सीमित रही।

न ही एक या दो गाँव तक।

यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई।

साहित्यिक जुड़ाव: फणीश्वर नाथ रेणु

‘धर्मयुग’ पत्रिका के युवा पत्रकार जुगनू शारदेय ने जब इस घटना के बारे में सुना, तो अपनी पत्रिका में नीतीश कुमार का इंटरव्यू छापने की इच्छा प्रकट की। नीतीश जी भी कभी-कभी ‘धर्मयुग’ पत्रिका में लिखा करते थे।

नीतीश कुमार का यह इंटरव्यू जब प्रसिद्ध साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु ने पढ़ा, तो उन्होंने पत्रकार जुगनू से कहा:

“वह नीतीश जैसे ही किसी लड़के को अपना दामाद बनाना चाहते हैं।”

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